September 14, 2026

गैस सिलिंडर संकट का असर, ढाबों और रेहड़ियों में बढे खाने-पीने के दाम

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ब्लैक में महंगे दामों पर मिल रहे सिलिंडर

देहरादून। देहरादून में रसोई गैस की किल्लत का असर अब शहर के स्ट्रीट फूड और खानपान कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस की बढ़ती कीमतों और अनियमित आपूर्ति ने छोटे खाद्य कारोबारियों को मेन्यू बदलने पर मजबूर कर दिया है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।

शहर की सड़कों पर लगने वाली रेहड़ी-ठेलियों में अब परांठे और छोले-भटूरे की जगह राजमा-चावल और कढ़ी-चावल जैसे व्यंजन ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। कारोबारियों का कहना है कि गैस की कमी और महंगाई के चलते उन्हें ऐसे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं, जिनमें लागत कम आए।

वहीं, वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की किल्लत के कारण खाने-पीने की कीमतों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। पहले जहां सस्ती थाली 50 रुपये में मिल जाती थी, अब उसकी कीमत बढ़कर 70 रुपये तक पहुंच गई है। पराठों के दाम भी 30-40 रुपये से बढ़कर 60-70 रुपये हो गए हैं।

ब्लैक में महंगे दामों पर मिल रहे सिलिंडर

रेहड़ी-ढाबा संचालकों के अनुसार, वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की उपलब्धता बेहद कम हो गई है। मजबूरी में कई लोग घरेलू या छोटे सिलिंडरों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि कुछ को ब्लैक में महंगे दामों पर गैस खरीदनी पड़ रही है। जहां पहले सिलिंडर 1700-1800 रुपये में मिल जाता था, अब वही 4000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। छोटे सिलिंडरों में गैस भरवाने का खर्च भी 100-110 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 300 रुपये प्रति किलो से अधिक हो गया है।

गैस खत्म होते ही बंद हो रही दुकानें

गैस संकट के चलते कई छोटे ढाबे और रेहड़ियां अस्थायी रूप से बंद हो चुकी हैं। जिन कारोबारियों को किसी तरह सिलिंडर मिल पा रहा है, वही दुकान चला पा रहे हैं। गैस खत्म होते ही उन्हें दुकान बंद करनी पड़ती है।

लालपुल-कारगी रोड वेंडिंग जोन में कई ढाबे बंद पड़े हैं, जबकि कुछ संचालक भट्ठी या वैकल्पिक साधनों से काम चला रहे हैं। कुल मिलाकर गैस संकट ने न सिर्फ कारोबारियों की कमर तोड़ी है, बल्कि आम लोगों की थाली भी महंगी कर दी है।

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